यूरोपियों का आगमन : पुर्तगाली


1 पुर्तगाली -       भारत में सर्वप्रथम आने वाले यूरोपियों में पुर्तगाली ही थे लेकिन गए थे सबसे अंत में। इन्होने मसाला व्यापार को ध्यान में रखते हुए भारत में प्रवेश किया और विभिन्न स्थानों पर फैक्ट्री, कारखाने, व्यापारिक केंद्र या बस्ती की स्थापना की। यह कारखाना उत्पादन के केंद्र नहीं थे बल्कि भंडारगृह थे। यहाँ पर वस्तुओं का संग्रह कर उन्हें यूरोप भेजा जाता था। यह फैक्ट्री एक किले बंद क्षेत्र जैसी होती थी जिसमें गोदाम, कार्यालय तथा व्यापारियों के लिए आवास भी होते थे।  पुर्तगालीयों ने कारखाना निर्माण की इस पद्धति को इटली के व्यापारियों से प्राप्त किया था। 

                                                पुर्तगाली यात्री वास्कोडिगामा सर्वप्रथम 1498 में भारत के पश्चिमी तट कालीकट में आया था जहाँ  उसका स्वागत हिन्दू शासक जमोरिन ने किया था।  उनकी वहाँ  मौजूद अरबी व्यापारियों ने विरोध किया और विरोध का कारण आर्थिक था। 

                                            भारत में प्रथम पुर्तगाली गवर्नर फ्रांसिस डी अल्मीडा था जिसने नीला पानी नीति ( blue water policy ) अपनायी।  वस्तुतः पुर्तगाली सरकार की ओर से कहा गया की पुर्तगाली व्यापारी ऐसे किले का निर्माण करे जिसका उद्देश्य सिर्फ सुरक्षा न होकर हिंदमहासागर के व्यापार के नियंत्रण को स्थापित करना भी हो। इसी को नीला पानी नीति कहा गया।

                                            पुर्तगाली गवर्नर अल्बुकर्क ने भारत में पुर्तगाली पुरुषों को भारतीय स्त्रियों के साथ विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया जिससे कि  भारत में पुर्तगाली बस्ती की स्थापना को मजबूत आधार मिल सके। अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है। 

                                            1661 में ब्रिटिश राजकुमार चार्ल्स -II के साथ पुर्तगाली राजकुमारी कैथरीन का विवाह हुआ। इसी क्रम में बॉम्बे ब्रिटिश राजकुमार को उपहार स्वरुप प्रदान किया गया। जिसने 1668 में बॉम्बे ब्रिटिश कंपनी को दे दिया। 

                                  भारत में पुर्तगालियों का योगदान यह रहा कि उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की तम्बाकू की खेती का प्रचलन किया और यूरोपीय भवन निर्माण की गोथिक शैली का भारत में प्रवेश कराया तथा यूरोपीय चित्रकला के तत्वों को भारत में प्रचलित किया। 




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