मुर्शीदकुली खाँ

मुर्शीदकुली खाँ :- 

इसे औरंगजेब द्वारा बंगाल का दीवान बनाया गया था। इस समय बंगाल का गवर्नर(सूबेदार) अजीमुशान था। जो राजदरबार से सम्बंधित होने के कारण प्रायः दिल्ली में रहता था अतः बंगाल की वास्तविक शाक्ति मुर्शिदकुली खाँ के पास थी 

     मुग़ल सम्राट फर्रूखशियर ने 1717 ई० में मुर्शीदकुली खाँ को बंगाल का सूबेदार नियुक्त किया । यह मुग़ल सम्राट द्वारा नियुक्त बंगाल का अंतिम सूबेदार था। इसी के समय से बंगाल में वंशानुगत शासन की शुरुआत होती है।

मुर्शीद कुली खान के राजस्व सुधार:-

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1 इसने छोटे जमींदारों के विरुद्ध कार्यवाही की और जागीर भूमि का एक बड़ा हिस्सा खालिसा भूमि (राजकीय भूमि) में परिवर्तित कर दिया फलतः राजकीय आय बढ़ी।

2 इसने बड़े जमींदारों को बनाये रखा जो राजस्व वसूली में उसका सहयोग करते थे। अतः इनकी जागीर भूमि को बनाये रखा।

3 किसानों को ऋण की सुविधा (ताकावी) उपलब्ध कराया ।

4 मुर्शीद कुली खाँ के सुधारों से नाराज होकर गुलाममोहम्मद, उदय नारायण जैसे जमींदारों ने विद्रोह किया। इन विद्रोह का दमन कर मुर्शीद कुली खाँ ने अपनी राजधानी ढ़ाका से मुर्शिदाबाद में बनाई।




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