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खगोल विज्ञान 2

 आकाश गंगा( Galaxy )- ब्रह्माण्ड में तारों के असंख्य समूह को Galaxy कहते हैं। आकाश गंगा का आकार सर्पिलाकार (spiral) होता है । तारों इस सर्पिलाकार भुजा के किनारे पाया जाता है । जैसे जैसे तारों की आयु बढ़ती जाती है वह आकाश गंगा के मध्य में जाने लगता है।               आकाश गंगा के मध्य भाग को बल्ज कहते हैं। बल्ज में ब्लैक होल पाये जाते हैं। बल्ज में तारों की संख्या अधिक होती है।           आकाश गंगा का निर्माण आज से 12 बिलियन वर्ष पूर्व हुआ था । ब्रह्माण्ड में लगभग 100 अरब गंगाए हैं और प्रत्येक आकाश गंगा में लगभग 100 अरब तारे हैं ।  Super Clauster-  तीन आकाश गंगा के समूह को super clauster कहा जाता है। हम जिस Supar Clauster में रहते हैं उसमें भी तीन आकाश गंगाए हैं। 1 देवयानी (Andromeda)   2 मंदाकिनी(Milky way)    3 NGC-M-33 देवयानी - यह हमसे सबसे करीबी आकाश गंगा है। यह हमारी आकाश गंगा से 2.2 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है।              दूसरा निकटतम आकाश गंगा NGC-M-33 है। सूर्य जिस आकाश गंगा में है उसे मन्दाकिनी कहते हैं।

खगोल विज्ञान (Astronomy)

 * ब्रह्मांड का अध्ययन Astronomy (खगोलकी) कहलाता है। # ब्रह्माण्ड क्या है? ब्रह्मांड- दिखाई पड़ने वाले समस्त आकाशीय पिंड को ब्रह्माण्ड कहते हैं। ब्रह्माण्ड विस्तारित हो रहा है। ब्रह्माण्ड में सर्वाधिक संख्या तारों की है। # तारा क्या है और कैसे बनता है? तारा- वैसा आकाशीय पिंड जिसके पास अपनी उष्मा तथा प्रकाश हो तारा कहलाता है।                     तारा बनने से पहले यह विरल गैस का गोला होता है। जब विरल गैस केंद्रित होकर पास आ जाते हैं तो घने बादल के समान छा जाते हैं जिन्हें निहारिका (Nebula) कहते हैं।            जब इन Nebula में संलयन विधि द्वारा दहन की क्रिया प्रारम्भ हो जाती है तो वह तारा का रूप ले लेता है। तारे में हाइड्रोजन का संलयन He में होते रहता है। # तारे का रंग किसपर निर्भर करता है? तारे का रंग उसके पृष्ठ ताप पर निर्भर करता है। तारा का रंग- *तारा निम्न ताप (6000℃) पर लाल रंग का दिखाई देता है। *मध्यम ताप पर सफेद *उच्च ताप पर नीला  # तारों का भविष्य- तारों का भविष्य उसके प्रारंभिक द्रव्यमान पर निर्भर करता है। *लाल दानव - जब तारा (सूर्य) का ईंधन समाप्त होने लगता है तो वह लाल दानव का