खगोल विज्ञान (Astronomy)

 * ब्रह्मांड का अध्ययन Astronomy (खगोलकी) कहलाता है।

# ब्रह्माण्ड क्या है?

ब्रह्मांड- दिखाई पड़ने वाले समस्त आकाशीय पिंड को ब्रह्माण्ड कहते हैं। ब्रह्माण्ड विस्तारित हो रहा है। ब्रह्माण्ड में सर्वाधिक संख्या तारों की है।

# तारा क्या है और कैसे बनता है?

तारा- वैसा आकाशीय पिंड जिसके पास अपनी उष्मा तथा प्रकाश हो तारा कहलाता है।

                    तारा बनने से पहले यह विरल गैस का गोला होता है। जब विरल गैस केंद्रित होकर पास आ जाते हैं तो घने बादल के समान छा जाते हैं जिन्हें निहारिका (Nebula) कहते हैं।

           जब इन Nebula में संलयन विधि द्वारा दहन की क्रिया प्रारम्भ हो जाती है तो वह तारा का रूप ले लेता है। तारे में हाइड्रोजन का संलयन He में होते रहता है।


# तारे का रंग किसपर निर्भर करता है?

तारे का रंग उसके पृष्ठ ताप पर निर्भर करता है।

तारा का रंग-

*तारा निम्न ताप (6000℃) पर लाल रंग का दिखाई देता है।

*मध्यम ताप पर सफेद

*उच्च ताप पर नीला 


# तारों का भविष्य-

तारों का भविष्य उसके प्रारंभिक द्रव्यमान पर निर्भर करता है।

*लाल दानव - जब तारा (सूर्य) का ईंधन समाप्त होने लगता है तो वह लाल दानव का रूप ले लेता है और लाल दानव का आकार बड़ा होने लगता है। (लगभग 90% ईंधन का उपयोग कर चुका होता है तो लाल दानव बनता है)

Case-I - यदि लाल दानव का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के 1.44 गुणा से छोटा है तो वह श्वेत वामन बनेगा।


श्वेत वामन - (White Dwarf)- इसे जीवाश्म तारा कहते हैं। छोटा तारा अंतिम रूप से श्वेत वामन अवस्था में ही चमकता है।

काला वामन (Black Dwarf ) - स्वेत वामन जब चमकना छोड़ देता है तो वह काला वामन का रूप ले लेता है। इस प्रकार छोटे तारे का अंत हो जाता है।


Case II- यदि लाल दानव का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के 1.44 गुणा से बड़ा है तो वह अभिनव तारा का रूप ले लेगा।

*अभिनव तारा (Super Nova)- इसमें कार्बन जैसे हल्के पदार्थ लोहा जैसे भारी पदार्थ में परिवर्तित होने लगता है जिस कारण ये विस्फोट करने लगते हैं । अतः इसे विस्फोटक तारा कहते हैं।

विस्फोट के बाद यह न्यूट्रॉन तारा का रूप ले लेता है।

*न्यूट्रॉन तारा - न्यूट्रॉन तारा विस्फोट के बाद बनता है। इसका घनत्व उच्च हो जाता और आकार छोटा हो जाता है।

*Pulser- यह तारा चमकता और बुझता रहता है । इससे उच्च संख्या में विद्युत् चुम्बकीय क्षमता अति उच्च होती है।


*Black Hole(कृष्ण विवर)- इसका घनत्व अति उच्च होता है। यह प्रकाश को भी गुजरने नहीं देता है। इसकी खोज चंद्रशेखर ने की।

* Black Hole की चुम्बकीय क्षमता भी अधिक होती है। ये स्वेत वामन और काला वामन को भी अपनी ओर खींच लेता है। अतः तारों का अंत ब्लैक हॉल के रूप में हो जाता है।


# चंद्रशेखर सीमा- सूर्य के द्रव्यमान के 1.5 गुणा(1.44) द्रव्यमान को चंद्रशेखर सीमा कहते हैं । लाल दानव के बाद तारों का भविष्य चंद्रशेखर सीमा पर निर्भर करता है।

लाल दानव का आकार बहुत ही बड़ा हो जाता है।

सूर्य जब लाल दानव का रूप ले लेगा तो वह अपने समीप के चार ग्रहों को जला देगा ।

#White Hole - यह एक परिकल्पना है जिससे यह मान लिया जाता है कि सभी प्रकाश एक ही बिंदु से आ रहे हैं।






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